2005 में बिहार विधानसभा चुनावों को प्रभावित करने के प्रयासों में शामिल एक चुनाव आयुक्त की कुर्सी बचाने के लिए कांग्रेस और राजद ने मिलकर कार्रवाई की थी। इस घटनाक्रम ने उस समय राजनीतिक गलियारों में चर्चा को जन्म दिया। दोनों दलों ने मिलकर उस अधिकारी के पद से हटने के खिलाफ लड़ाई लड़ी, जिससे उनकी नियुक्ति सुरक्षित रही।
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