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Darbhanga

मिथिला विश्वविद्यालय में पीएचडी शोधार्थियों के भविष्य पर अनिश्चितता

Published on 30 May 2026, 01:58 AM 111 Views
मिथिला विश्वविद्यालय में पीएचडी शोधार्थियों के भविष्य पर अनिश्चितता
Image generated by AI for illustrative purposes

ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में पीएचडी के शोधार्थियों की मौखिकी (वाइवा) डेढ़ साल से लंबित है, जिससे उनके शोध कार्य और भविष्य पर अनिश्चितता के बादल छा गए हैं. इस विलंब के कारण कई शोधार्थियों को अपनी डिग्री पूरी करने में बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है.

मौजूदा स्थिति में, विश्वविद्यालय प्रशासन पर शोधार्थियों की मौखिकी जल्द आयोजित करने का दबाव बढ़ रहा है ताकि उनके अकादमिक करियर को आगे बढ़ाया जा सके. ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में पीएचडी के शोधार्थियों की मौखिकी डेढ़ साल से नहीं हो पाई है, जिससे उनकी डिग्री पूरी होने में अनावश्यक देरी हो रही है. यह स्थिति उच्च शिक्षा के क्षेत्र में प्रशासनिक अक्षमता को दर्शाती है और दरभंगा जैसे शैक्षिक केंद्र के लिए एक गंभीर चुनौती है, जहाँ गुणवत्तापूर्ण शोध को बढ़ावा देना अत्यंत आवश्यक है.


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